Uvasagharam stotra With Meaning। उवसग्गहरं स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित

Uvasagharam stotra – उवसग्गहरं स्तोत्र जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ स्वामी का आराधना स्तोत्र है। इस स्तोत्र की रचना आचार्य भद्रबाहु जी ने की थी, जिसकी रचना का काल लगभग दूसरी-चौथी शताब्दी माना जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि अगर पूरी आस्था के साथ इस स्तोत्र का पठन-पाठन जप किया जाए तो सभी प्रकार की बाधाएं, कष्ट दूर हो जाते हैं। जैन समुदाय में इसका व्यापक रूप से पाठ किया जाता है। (Uvasagharam stotra Lyrics in hindi & English).

Uvasagharam stotra – उवसग्गहरं स्तोत्र

Uvasagharam stotra - उवसग्गहरं स्तोत्र . Uvasagharam stotra Lyrics in hindi & English

पाठ करने से पूर्व सात बार बोलें: ‘श्रीभद्रबाहुप्रसादात् एष योग: फलतु’

उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्म-घण मुक्कं ।
विसहर विस निन्नासं, मंगल कल्लाण आवासं ।।1।।

अर्थ : प्रगाढ़ कर्म- समूह से सर्वथा मुक्त, विषधरों के विष को नाश करने वाले, मंगल और कल्याण के आवास तथा उपसर्गों को हरने वाले भगवान पार्श्वनाथ को मैं वंदना करता हूं !

English Translation : I bow to Lord Parshwanath, who is attended by the distress removing Parshwa
deity, who is free from all types of Karma, who is the destroyer of the poisonous defilements
and who is the abode of bliss and well-being.


विसहर फुलिंग मंतं, कंठे धारेइ जो सया मणुओ ।
तस्स गह रोग मारी, दुट्ठ जरा जंति उवसामं ।।2।।

अर्थ : विष को हरने वाले इस मंत्ररूपी स्फुलिंग को जो मनुष्य सदैव अपने कंठ में धारण करता है, उस व्यक्ति के दुश ग्रह, रोग बीमारी, दुष्ट, शत्रु एवं बुढापे के दुःख शांत हो जाते है !

English Translation : If one always holds in his neck the charm of Visaharfulling, his evil planetary
effects, disease, epidemics and acute fever are calmed down. There is an 18 letter
Visaharfulling Mantra associated with the name of Pärshwanäth, which is considered effective
against all types of pain and affliction. The Mantra is: Namiuna Päsa Visahara Vasaha Jina
Fullinga.


Uvasagharam stotra Lyrics in hindi & English

चिट्ठउ दुरे मंतो, तुज्झ पणामो वि बहु फलो होइ ।
नरतिरिएसु वि जीवा, पावंति न दुक्ख-दोगच्चं।।3।।

अर्थ :
हे भगवान ! आपके इस विषहर मंत्र की बात तो दूर रहे, मात्र आपको प्रणाम करना भी बहुत फल देने वाला होता है ! उससे मनुष्य और तिर्यंच गतियों में रहने वाले जीव भी दुःख और दुर्गति को प्राप्त नहीं करते है!

English Translation : Let aside that charm, obeisance to you also would be highly fruitful; (thereby)
humans and animals too would not get misery or evil state. The darkness disappears with the
rise of the sun. But prior to sunrise there is the twilight of the morning, which removes the
darkness of the night. Similarly, the above said Mantra would, no doubt, remove the pain and
distress, but even the obeisance to the Lord can avert such affliction.


Uvasagharam stotra – Mp3 download

उवसग्गहरं स्तोत्र – Pdf Download 


तुह सम्मत्ते लद्धे, चिंतामणि कप्पपाय वब्भहिए ।
पावंति अविग्घेणं, जीवा अयरामरं ठाणं ।।4।।

अर्थ :
वे व्यक्ति आपको भलीभांति प्राप्त करने पर, मानो चिंतामणि और कल्पवृक्ष को पा लेते हैं और वे जीव बिना किसी विघ्न के अजर, अमर पद मोक्ष को प्राप्त करते है!

English Translation : By gaining the right perception laid by you, which is superior to the desire yielding
jewel and the desire yielding tree, souls easily attain the unaging, immortal state. 


इअ संथुओ महायस, भत्तिब्भर निब्भरेण हिअएण ।
ता देव दिज्ज बोहिं, भवे भवे पास जिणचंद ।।5।।

अर्थ :
हे महान यशस्वी ! मैं इस लोक में भक्ति से भरे हुए हृदय से आपकी स्तुति करता हूं! हे देव! जिन चंद्र पार्श्वनाथ ! आप मुझे प्रत्येक भाव में बोधि (रत्नत्रय) प्रदान करें !

English Translation : Oh. Highly esteemable Lord, I have thus prayed to you with the heart flowing with
devotion; hence Omniscient Parshwa Lord, bestow the wisdom to me in every life.


उवसग्गहरं स्तोत्र 7 गाथा 


ओं अमरतरु-कामधेणु-चिंतामणि-कामवुंफभमादिया।

ॐ, अमरतरु, कामधेणु, चिंतामणि, कामकुंभमादिया
सिरि पासणाह सेवाग्गहणे सव्वे वि दासत्तं ।६।

अर्थ- श्री पार्श्वनाथ भगवान् की सेवा ग्रहण कर लेने पर ओम्, कल्पवृक्ष, कामधेनु, चिंतामणि रत्न, इच्छापूर्ति करने वाला कलश आदि सभी सुखप्रदाता कारण उस व्यक्ति के दासत्व को प्राप्त हो जाते हैं।

English Translation : Aum, Kalpavriksha, Kamadhenu, Chintamani Ratna, wishful Kalash etc., all take pleasure of that person’s slavery due to the service of Shree Parshwanath.


उवसग्गहरं त्थोत्तं कादूणं जेण संघ कल्लाणं
करुणायरेण विहिदं स भद्दबाहु गुरु जयदु ।७।

अर्थ- जिन करुणाकर आचार्य भद्रबाहु के द्वारा संघ के कल्याणकारक यह ‘उपसर्गहर स्तोत्र’ निर्मित किया गया है, वे गुरु भद्रबाहु सदा जयवन्त हों।

English Translation : The compassionate Acharya Bhadrabahu has created this ‘Uvasagharam (Prefixional) Stotra’ for the welfare of the Sangh, may Guru Bhadrabahu always live.


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